Saturday, July 14, 2018

रोज-रोज तुमसे मिलने आऊं  ऐसा मेरा कोई इरादा नहीं।

रोज-रोज तुमसे मिलने आऊं
ऐसा मेरा कोई इरादा नहीं।
पूरी कर दूँ तुम्हारी हर ख्वाहिश
ऐसा मेरा कोई वादा नही।

मेरा दिल फंस जाये जाल में
इतना सीधा-सादा नहीं।
मेरा दिल बाढ़शाह हैं बाढ़शाह
शतरंज का प्यादा नहीं।

मेरी कलम से लिख जाये किसी
सूरज के उगने की कहानी।
मेरी जागती हुँयी इन आँखों में
सपनें भी इतना ज्यादा नही।।

विकास पाण्डेय

Friday, March 30, 2018

हे ईश्वर! मुझे प्रेम करने वालो पर अपनी कृपादृष्टि सदा  सर्वदा बनाये रखना