Tuesday, December 10, 2019

जनसंपर्क स्थल

मैं कानपुर नगर में जनसंपर्क स्थल के रूप में कुछ चाय की दुकानों का प्रयोग करता हूँ।


-गौशाला स्थित चाय की दुकानें।

- यशोदा नगर बाईपास से किदवई नगर चौराहा मार्ग में के- ब्लॉक किदवई नगर में बरगद के पेड़ के नीचे स्थित चाय की दुकान।

- कानपुर नगर निगम एवं केडीए स्थित चाय की दुकानें।

- अपर श्रमायुक्त कार्यालय के पास स्थित चाय की दुकानें।

- विजय नगर चौराहे पर स्थित चाय की दुकानें।

- रेव मोती थ्री के पास स्थित चाय की दुकानें।

- नवीन मार्केट में भाजपा कार्यालय के सामने स्थित चाय की दुकान।

- जीएसटी कार्यालय विकास नगर के पास स्थित चाय की दुकानें।

- सरसैया घाट के पास स्थित लोक निर्माण विभाग के कार्यालय के सामने स्थित चाय की दुकानें।

- नवीन मार्केट के पास स्थित लोक निर्माण विभाग कार्यालय के पास स्थित चाय की दुकानें।

- कचेहरी के पास स्थित चाय की दुकानें।

Saturday, November 30, 2019

साहित्यिक चिंतन

मेरे साहित्यिक चिंतन का केंद्र बिंदु मंचीय मोह पाश से मुक्त शाश्वत साहित्य है।

मैं चाहता हूं कि मैं अपने जीवन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए सभी पात्रों को अपने साहित्य के माध्यम से अजर , अमर एवं शाश्वत् बना दूँ।

Friday, November 29, 2019

धरती की धूल पर खिला पुष्प

लोग चंद्रमा और तारों से मिलने के लिए आकाश में जाने के लिए लालायित रहते हैं। मैं कहता हूं चंद्रमा और तारों को यदि मुझसे मिलने की लालसा हो तो धरातल पर आ जाये!

आप उस पुष्प की तरह बनो जो धरती की धूल पर खिला हो और जिससे मिलने के लिए आकाश के तारे भी लालायित हो उठे।

Tuesday, November 26, 2019

कविताओं का संग्रह

एक दिन मुझसे कानपुर के प्रतिष्ठित आलोचक श्री श्याम सुंदर निगम जी ने पूछा- विकास, बहुत से रचनाकारों के काव्य संग्रह आ चुके है, तुम्हारी कविताओं का संग्रह कब प्रकाशित होगा?
मैंने कहा- बाबूजी, मैं चाहता हूं कि मेरी कविताओं का संग्रह मेरी परिपक्वता को प्रदर्शित करे न कि मेरी अपरिपक्वता एवं अज्ञानता को। अतः अभी दो से ढाई वर्ष का समय लग जायेगा।

Friday, November 1, 2019

तारा

तेज चमकते तारों को भी कभी-कभी अपनी चमक कम कर देना चाहिए अन्यथा नजर लग जाती है।

Saturday, October 12, 2019

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा के अवसर पर आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, शीतलता, धैर्य, बुद्धि, विवेक एवं अमृत आदि का आगमन एवं संचार हो।

शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें।

शरद पूर्णिमा की रात्रि में ही भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था।

मंदिर

मंदिर में जाकर भगवान को खुश करने से पहले अपने पड़ोसियों को खुश करना बहुत आवश्यक है।

मानव रूपी देव

मैं भगवान को मंदिर में ही नहीं अपने पड़ोस में भी देखता हूं क्योंकि पड़ोस में बसे हुए मानव रूपी देवताओं की सेवा करके मैं अपने आपको धन्य समझता हूं।

समाज का कल्याण

यदि किसी से हँस करके बात कर लेने से या समय देने से समाज का कल्याण होता है तो मैं इसे भी समाज की सेवा एवं धर्म कार्य ही समझता हूं।

समाजिक हित चिन्तन

मैं अपनी शक्ति, बल, बुद्धि, विद्या, विवेक, यश, शब्द, व्यक्तित्व का प्रयोग समाजिक हित चिन्तन में लगे लोगों के उद्भव में करने से पीछे नही हटता। वह मुझसे प्राप्त सामर्थ्य से कुछ व्यक्तिगत लाभ भी प्राप्त कर लेता है तो मुझे कोई आपत्ति नही होती।

शब्द

कार्य सभी के महत्वपूर्ण होते हैं किंतु जब शब्द महत्वपूर्ण होने लगे तो समझ लीजिए कि जीवन सार्थकता की दिशा पर आगे बढ़ रहा है किंतु यह भी स्मरण रखना चाहिए कि शब्द तभी महत्वपूर्ण होते हैं जब हम स्वयं अपने शब्दों को महत्व देते हैं।

Friday, October 11, 2019

सोच

जब आप सबके बारे में अच्छा सोचने लगते हैं तो सब मिलकर आपके बारे में अच्छा सोचने लगते हैं, और वो सभी मिलकर आपको श्रेष्ठ बना देते हैं।

Thursday, October 10, 2019

रामलीला

2 अक्टूबर 2019 को मुझे कानपुर नगर में यशोदा नगर थाने के पास एवं किदवई नगर एच- ब्लॉक में होने वाली रामलीला देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

4 अक्टूबर 2019 चालीस दुकान के पास आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

7 अक्टूबर 2019 को धरीपुरवा (बसन्त विहार के निकट) में आयोजित रामलीला देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

Thursday, August 29, 2019

साहित्य एवं अध्यात्म

हम अपने जीवन में सदैव कुछ न कुछ करते रहते हैं जिसमें साहित्य एवं अध्यात्म के क्षेत्र में किए गए कार्य सदैव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ दायक ही होते हैं अतः साहित्यिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में कोई ना कोई कार्य करते रहना चाहिए। यह आपके व्यावसायिक जीवन में भी कहीं ना कहीं सफलता के लिए आधार बनाते है। साहित्य एवं अध्यात्म के क्षेत्र में किये गये कार्य आपके व्यावसायिक जीवन की कठिनाईयां एवं तनाव को दूर कर आपके व्यवसाय के लिये भी सकारात्मक वातावरण तैयार करते है।

साहित्य एवं अध्यात्म का अर्थ बहुत व्यापक होता है, प्रत्येक व्यक्ति के लिए साहित्य एवं अध्यात्म की परिभाषाएं भिन्न-भिन्न हो सकती है।

Wednesday, August 28, 2019

अपेक्षा

एक मेरे अधिवक्ता मित्र जो कि उच्च न्यायालय में भारत सरकार के अधिवक्ता हैं ने कहा कि विकास अगर तुम हाईकोर्ट में बने रहोगे तो एक दिन तुम डायरेक्ट जज बनोगे!
उसी शाम एक मेरे मित्र ने कहा कि विकास तुम कब वरिष्ठ अधिवक्ता बनोगे!
व्यक्ति आपकी योग्यता को देखकर ही आप से अपेक्षा रखता है।



हे! ईश्वर मुझे इतनी शक्ति देना कि मैं इन सभी शुभचिन्तकों की अपेक्षाओं पर खरा उतर सकूं!




यह वही उच्च न्यायालय हैं जहां पर मेरे दूर के एक रिश्तेदार एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल हुआ करते थे जो मुझे घास तक नहीं डालते थे और यह वही उच्च न्यायालय है जहाँ राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता भी मुझे जानते है। जिस उम्र में लोग परिचय के मोहताज होते है, उस उम्र में मुझे उन लोगों की शुभकामनायें मिलती है जिनसे लोग परिचय बनाने के अवसर पाना चाहते है।




किसी शायर ने बहुत खूबसूरत कहा है -

मंजिल मिले ना मिले मुझे इसका गम नही
मंजिल की जुस्तजू मेरा कारवां तो है






 विकास पाण्डेय

Friday, August 23, 2019

विरासत

सबसे अधिक महत्वपूर्ण संपत्ति आपके नाम की होती है, यह आप के ना रहने पर भी आपकी आने वाली पीढियों के सदैव साथ रहती है और इसे कोई भी व्यक्ति आपकी संतान या आने वाली पीढियों से छीन नहीं सकता है। इस विरासत का लाभ आपकी संतान या आने वाली पीढियों के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति या अन्य सगे- सम्बन्धी भी उठा सकते।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय एवं भारत के 17 राज्यों के 15 उच्च न्यायालयों के अधिवक्ताओं के मध्य के साथ-साथ राजनीतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, साहित्यिक एवं कला जगत के लोगों के मध्य मेरा नाम मेरी आने वाली पीढियों के लिये एक विरासत हैं।

Friday, August 16, 2019

प्रचार

मैंने जीवन में दो तरह के लोगों को तैयार किया है एक वह जो मेरा प्रचार करते हैं, दूसरे वह जो मेरा दुष्प्रचार करते हैं। प्रचार का तो मुझे प्रत्यक्ष लाभ होता है कि मेरी सकारात्मक चर्चा होती है। दुष्प्रचार का भी मुझे अप्रत्यक्ष लाभ होता है क्योंकि दुष्प्रचार करने वालों के हाथ में मेरी चर्चा प्रारंभ करना तो है, चर्चा खत्म करना नहीं है। स्मरण रखना चाहिए कि जब कोई चर्चा प्रारंभ हो जाती है तो उसके पश्चात चर्चा प्रारंभ करने वालों के हाथ से निकल कर के उन लोगों के मध्य पहुंच जाती है जो व्यक्ति उसे सुन रहे होते हैं और उस चर्चा पर उनके स्वयं के तर्क, विचार, भाव आदि प्रभाव डालने लगते है। मुझे मालूम है कि सादगी पूर्ण विचारों से अधिक चर्चा चटपटे विचारों की होती है। जब कुछ लोगों ने मेरी कुछ बातों की चर्चा की तब मैं मन में मुस्कराया और सोचा महानुभाव आपका ध्यान वही क्यों गया!

Wednesday, August 14, 2019

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की हार्दिक शुभकामनायें।

देश की #स्वतंत्रता के लिये अपना #सर्वस्व #समर्पित करने वाले #वीरों के लिये मेरी कुछ पंक्तियां

 #मुक्त #धरा है #मुक्त #गगन है
मुक्त है अपना #दाना #पानी
#अंत हुआ #गोरों का #शासन
#बन्द हुआ है #कालापानी

नहीं रहा अब #मनमानापन
#भाग गये हैं #अभिमानी
#खुलकर उड़ते आज #परिंदे
टूट गए हैं #जाल #ब्रितानी।

किया जिन्होंने जीवन #अर्पित
उनको है ये शब्द #समर्पित।

मेरी कुछ पंक्तियां देश के वीर सैनिकों के लिये जो कि हमारी स्वतंत्रता को बनाये एवं बचाये रखने के लिये सदैव तैयार रहते हैं

#सीमा पर जो #पड़े हुये हैं
#प्रहरी बनकर #खडे  हुये  हैं
#शत्रु नही आने पायेगा
बन #हिमालय #अडे  हुये है

उन #वीरों के #सम्मान पर
#राष्ट्र के #अभिमान पर

किया जिन्होंने जीवन अर्पित
उनको हैं ये शब्द समर्पित

समस्त #देशवासियों को #स्वतंत्रता #दिवस  (15 अगस्त) की #हार्दिक #शुभकामनायें।

#विकास पाण्डेय

https://twitter.com/vikpandey

संस्मरण

आजकल कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी में नए लोगों के आने से बहुत अधिक परेशान हो जाते हैं, मैं उन लोगों से यही कहना चाहता हूं कि उस समय को याद करिए जब भारतीय जनता पार्टी कार्यालय खामोशियों में डूबा रहता था और कार्यालय की खामोशी श्री दिवाकर नाथ त्रिपाठी जी की उन्मुक्त हंसी से ही टूटती थी और आज यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि कम से कम उस कार्यालय में रौनक तो है! वह दौर भी याद करिए जब उस कार्यालय में श्री शिव शरण पाठक जी संगठन मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे और उस समय कार्यालय की स्थिति यह थी कि बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता था। एक शाम जब मैं कार्यालय में गया उस समय कार्यालय में श्री शिव शरण पाठक जी (तत्कालीन विभाग संगठन मंत्री, प्रयाग), पूर्व विधायक श्री प्रभाशंकर पाण्डेय जी, श्री दिवाकर नाथ त्रिपाठी जी एवं श्री अजय त्रिपाठी जी थे। श्री शिव शरण पाठक जी ने श्री प्रभा शंकर पाण्डेय जी को खिसकने का संकेत किया और श्री प्रभा शंकर पाण्डेय जी थोड़ा खिसक गए तो मैं भी आसन में बैठ गया। बैठ करके मैं सोच रहा था कि अगर कार्यालय गिरा तो किस ओर से भागेंगे और भागेंगे तो शेष बचेंगे या स्मृतिशेष! कुछ समय पश्चात समय बदला और 2014 में वाराणसी से श्री नरेंद्र मोदी जी जब माननीय लोक सभा सांसद के रूप में चुने गये तब श्री शिव शरण पाठक जी को उनके लोक सभा कार्यालय का प्रभारी बना दिया गया।
इसलिये मित्रों बदले हुये समय का स्वागत करिये। हृदय में प्रसन्नता का भाव रखिये कि आज जो व्यक्ति पूजा जा रहा है, स्वार्थ वश ही सही! मेरा आत्मीय है।

Monday, July 29, 2019

मेरा साहित्यिक जीवन

मेरे साहित्यिक जीवन का प्रारम्भ वर्ष 2003- 04 के लगभग हुआ था जब मैं पहली बार जिला बार एसोसिएशन, इलाहाबाद के द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन को सुनने गया था जिसमें मुझे यश शेष कैलाश गौतम जी एवं श्री कमलेश द्विवेदी जैसे श्रेष्ठ कवियों को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ था।

मेरा जीवन

माघ मास, नवमी, कृष्ण पक्ष का साथ मिला
दो हजार पैंतीस विक्रम संवत का हुआ राज।
जब विचरण करती स्वाति आयी नक्षत्रलोक
चातक जातक बनकर निरखी हुआ विराज।।

प्रथम बार ध्वज प्रणाम

मैंने प्रथम बार ध्वज प्रणाम अपनी ननिहाल में किया था जब मैं बहुत छोटा था, उस समय मेरीआयु लगभग 11-12 वर्ष रही होगी। मेरे प्रथम ध्वज प्रणाम की स्मृति सदैव इसलिये भीअविस्मरणीय रही है क्योंकि ध्वज प्रणाम करते समय ध्वज दण्ड से मस्तक के स्पर्श के प्रयत्न में ध्वज को ही असन्तुलित कर बैठा था। फिर मेरे ममेरे भाई ने ध्वज को सन्तुलित किया।

श्री गुरु पूजन कार्यक्रम

मैंने श्री गुरु पूजन कार्यक्रम में लगभग वर्ष 2014 से जाना प्रारम्भ किया था और यह भी एक सत्य हैं कि सर्व प्रथम अधिवक्ता मिलन, प्रयाग महानगर के द्वारा किये गये श्री गुरु पूजन कार्यक्रम से ही प्रारम्भ किया था जो कि अनवरत चल रहा हैं।

इसका यह आशय कदापि नही है कि यह प्रथम वर्ष था जब मेरा परिचय़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ था। इससे पूर्व भी मैं  प्रयाग महानगर में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में जाता रहता था और तत्कालीन विभाग प्रचारक श्रीमान मनोज जी (वर्तमान में सह-प्रान्त प्रचारक, अवध) का मार्गदर्शन प्राप्त करता रहता था। तत्कालीन विभाग प्रचारक श्रीमान मनोज जी से मेरा परिचय काशी क्षेत्र के भाजपा नेता श्री दिवाकर नाथ त्रिपाठी जी ने अप्रैल 2013 में कराया, जिस मुलाकात का उद्देश्य अटल बिहारी वाजपयी विचार मंच की स्थापना था। कुछ कारणों से अटल बिहारी वाजपयी विचार मंच का विचार तो आगे नही ले जा सका किन्तु तत्कालीन विभाग प्रचारक,  प्रयाग महानगर श्रीमान मनोज जी का मार्गदर्शन प्राप्त करता रहा। और जब मुझसे श्री गुरु पूजन कार्यक्रम में आने का आग्रह किया गया तो मैं सहर्ष तैयार हो गया।


किन्तु यह मेरा प्रथम ध्वज प्रणाम नही था। मैंने प्रथम बार ध्वज प्रणाम अपनी ननिहाल में किया था जब मैं बहुत छोटा था, उस समय मेरीआयु लगभग 11-12 वर्ष रही होगी। मेरे प्रथम ध्वज प्रणाम की स्मृति सदैव इसलिये भीअविस्मरणीय रही है क्योंकि ध्वज प्रणाम करते समय ध्वज दण्ड से मस्तक के स्पर्श के प्रयत्न में ध्वज को ही असन्तुलित कर बैठा था। फिर मेरे ममेरे भाई ने ध्वज को सन्तुलित किया।