मेरे साहित्यिक चिंतन का केंद्र बिंदु मंचीय मोह पाश से मुक्त शाश्वत साहित्य है।
मैं चाहता हूं कि मैं अपने जीवन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए सभी पात्रों को अपने साहित्य के माध्यम से अजर , अमर एवं शाश्वत् बना दूँ।
Saturday, November 30, 2019
Friday, November 29, 2019
धरती की धूल पर खिला पुष्प
लोग चंद्रमा और तारों से मिलने के लिए आकाश में जाने के लिए लालायित रहते हैं। मैं कहता हूं चंद्रमा और तारों को यदि मुझसे मिलने की लालसा हो तो धरातल पर आ जाये!
आप उस पुष्प की तरह बनो जो धरती की धूल पर खिला हो और जिससे मिलने के लिए आकाश के तारे भी लालायित हो उठे।
Tuesday, November 26, 2019
कविताओं का संग्रह
एक दिन मुझसे कानपुर के प्रतिष्ठित आलोचक श्री श्याम सुंदर निगम जी ने पूछा- विकास, बहुत से रचनाकारों के काव्य संग्रह आ चुके है, तुम्हारी कविताओं का संग्रह कब प्रकाशित होगा?
मैंने कहा- बाबूजी, मैं चाहता हूं कि मेरी कविताओं का संग्रह मेरी परिपक्वता को प्रदर्शित करे न कि मेरी अपरिपक्वता एवं अज्ञानता को। अतः अभी दो से ढाई वर्ष का समय लग जायेगा।
Friday, November 1, 2019
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