Thursday, August 29, 2019

साहित्य एवं अध्यात्म

हम अपने जीवन में सदैव कुछ न कुछ करते रहते हैं जिसमें साहित्य एवं अध्यात्म के क्षेत्र में किए गए कार्य सदैव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ दायक ही होते हैं अतः साहित्यिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में कोई ना कोई कार्य करते रहना चाहिए। यह आपके व्यावसायिक जीवन में भी कहीं ना कहीं सफलता के लिए आधार बनाते है। साहित्य एवं अध्यात्म के क्षेत्र में किये गये कार्य आपके व्यावसायिक जीवन की कठिनाईयां एवं तनाव को दूर कर आपके व्यवसाय के लिये भी सकारात्मक वातावरण तैयार करते है।

साहित्य एवं अध्यात्म का अर्थ बहुत व्यापक होता है, प्रत्येक व्यक्ति के लिए साहित्य एवं अध्यात्म की परिभाषाएं भिन्न-भिन्न हो सकती है।

Wednesday, August 28, 2019

अपेक्षा

एक मेरे अधिवक्ता मित्र जो कि उच्च न्यायालय में भारत सरकार के अधिवक्ता हैं ने कहा कि विकास अगर तुम हाईकोर्ट में बने रहोगे तो एक दिन तुम डायरेक्ट जज बनोगे!
उसी शाम एक मेरे मित्र ने कहा कि विकास तुम कब वरिष्ठ अधिवक्ता बनोगे!
व्यक्ति आपकी योग्यता को देखकर ही आप से अपेक्षा रखता है।



हे! ईश्वर मुझे इतनी शक्ति देना कि मैं इन सभी शुभचिन्तकों की अपेक्षाओं पर खरा उतर सकूं!




यह वही उच्च न्यायालय हैं जहां पर मेरे दूर के एक रिश्तेदार एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल हुआ करते थे जो मुझे घास तक नहीं डालते थे और यह वही उच्च न्यायालय है जहाँ राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता भी मुझे जानते है। जिस उम्र में लोग परिचय के मोहताज होते है, उस उम्र में मुझे उन लोगों की शुभकामनायें मिलती है जिनसे लोग परिचय बनाने के अवसर पाना चाहते है।




किसी शायर ने बहुत खूबसूरत कहा है -

मंजिल मिले ना मिले मुझे इसका गम नही
मंजिल की जुस्तजू मेरा कारवां तो है






 विकास पाण्डेय

Friday, August 23, 2019

विरासत

सबसे अधिक महत्वपूर्ण संपत्ति आपके नाम की होती है, यह आप के ना रहने पर भी आपकी आने वाली पीढियों के सदैव साथ रहती है और इसे कोई भी व्यक्ति आपकी संतान या आने वाली पीढियों से छीन नहीं सकता है। इस विरासत का लाभ आपकी संतान या आने वाली पीढियों के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति या अन्य सगे- सम्बन्धी भी उठा सकते।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय एवं भारत के 17 राज्यों के 15 उच्च न्यायालयों के अधिवक्ताओं के मध्य के साथ-साथ राजनीतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, साहित्यिक एवं कला जगत के लोगों के मध्य मेरा नाम मेरी आने वाली पीढियों के लिये एक विरासत हैं।

Friday, August 16, 2019

प्रचार

मैंने जीवन में दो तरह के लोगों को तैयार किया है एक वह जो मेरा प्रचार करते हैं, दूसरे वह जो मेरा दुष्प्रचार करते हैं। प्रचार का तो मुझे प्रत्यक्ष लाभ होता है कि मेरी सकारात्मक चर्चा होती है। दुष्प्रचार का भी मुझे अप्रत्यक्ष लाभ होता है क्योंकि दुष्प्रचार करने वालों के हाथ में मेरी चर्चा प्रारंभ करना तो है, चर्चा खत्म करना नहीं है। स्मरण रखना चाहिए कि जब कोई चर्चा प्रारंभ हो जाती है तो उसके पश्चात चर्चा प्रारंभ करने वालों के हाथ से निकल कर के उन लोगों के मध्य पहुंच जाती है जो व्यक्ति उसे सुन रहे होते हैं और उस चर्चा पर उनके स्वयं के तर्क, विचार, भाव आदि प्रभाव डालने लगते है। मुझे मालूम है कि सादगी पूर्ण विचारों से अधिक चर्चा चटपटे विचारों की होती है। जब कुछ लोगों ने मेरी कुछ बातों की चर्चा की तब मैं मन में मुस्कराया और सोचा महानुभाव आपका ध्यान वही क्यों गया!

Wednesday, August 14, 2019

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की हार्दिक शुभकामनायें।

देश की #स्वतंत्रता के लिये अपना #सर्वस्व #समर्पित करने वाले #वीरों के लिये मेरी कुछ पंक्तियां

 #मुक्त #धरा है #मुक्त #गगन है
मुक्त है अपना #दाना #पानी
#अंत हुआ #गोरों का #शासन
#बन्द हुआ है #कालापानी

नहीं रहा अब #मनमानापन
#भाग गये हैं #अभिमानी
#खुलकर उड़ते आज #परिंदे
टूट गए हैं #जाल #ब्रितानी।

किया जिन्होंने जीवन #अर्पित
उनको है ये शब्द #समर्पित।

मेरी कुछ पंक्तियां देश के वीर सैनिकों के लिये जो कि हमारी स्वतंत्रता को बनाये एवं बचाये रखने के लिये सदैव तैयार रहते हैं

#सीमा पर जो #पड़े हुये हैं
#प्रहरी बनकर #खडे  हुये  हैं
#शत्रु नही आने पायेगा
बन #हिमालय #अडे  हुये है

उन #वीरों के #सम्मान पर
#राष्ट्र के #अभिमान पर

किया जिन्होंने जीवन अर्पित
उनको हैं ये शब्द समर्पित

समस्त #देशवासियों को #स्वतंत्रता #दिवस  (15 अगस्त) की #हार्दिक #शुभकामनायें।

#विकास पाण्डेय

https://twitter.com/vikpandey

संस्मरण

आजकल कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी में नए लोगों के आने से बहुत अधिक परेशान हो जाते हैं, मैं उन लोगों से यही कहना चाहता हूं कि उस समय को याद करिए जब भारतीय जनता पार्टी कार्यालय खामोशियों में डूबा रहता था और कार्यालय की खामोशी श्री दिवाकर नाथ त्रिपाठी जी की उन्मुक्त हंसी से ही टूटती थी और आज यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि कम से कम उस कार्यालय में रौनक तो है! वह दौर भी याद करिए जब उस कार्यालय में श्री शिव शरण पाठक जी संगठन मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे और उस समय कार्यालय की स्थिति यह थी कि बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता था। एक शाम जब मैं कार्यालय में गया उस समय कार्यालय में श्री शिव शरण पाठक जी (तत्कालीन विभाग संगठन मंत्री, प्रयाग), पूर्व विधायक श्री प्रभाशंकर पाण्डेय जी, श्री दिवाकर नाथ त्रिपाठी जी एवं श्री अजय त्रिपाठी जी थे। श्री शिव शरण पाठक जी ने श्री प्रभा शंकर पाण्डेय जी को खिसकने का संकेत किया और श्री प्रभा शंकर पाण्डेय जी थोड़ा खिसक गए तो मैं भी आसन में बैठ गया। बैठ करके मैं सोच रहा था कि अगर कार्यालय गिरा तो किस ओर से भागेंगे और भागेंगे तो शेष बचेंगे या स्मृतिशेष! कुछ समय पश्चात समय बदला और 2014 में वाराणसी से श्री नरेंद्र मोदी जी जब माननीय लोक सभा सांसद के रूप में चुने गये तब श्री शिव शरण पाठक जी को उनके लोक सभा कार्यालय का प्रभारी बना दिया गया।
इसलिये मित्रों बदले हुये समय का स्वागत करिये। हृदय में प्रसन्नता का भाव रखिये कि आज जो व्यक्ति पूजा जा रहा है, स्वार्थ वश ही सही! मेरा आत्मीय है।