Friday, June 19, 2015

एक पुष्प खिला हैं रातों में,

एक पुष्प खिला हैं रातों में,
जिसकी सुगन्ध से महक रहे हैं,
वन, उपवन बरसातों में,
चन्द्र की चंचल किरणों ने,
जिसका सौन्दर्य संवारा हैं,
निशा ने जिस पर,
अपनी अंगड़ाई को वारा हैं,
वह कुमुदिनी का पुष्प हमें,
जग में सबसे प्यारा हैं।
Vikash Pandey
Kanpur

मैं कविता नहीं लिखता,

 मैं कविता नहीं लिखता, 
अपने जज्बात लिखता हूँ। 
अपनी खामोशी लिखता हूँ, 
अपने हालात लिखता हूँI 

जो किसी से नहीं कहा, 
वो बात लिखता हूँ। 
काँटे लिखता हूँ, 
फूलों की रात लिखता हूँ। 

मैं कविता नहीं लिखता, 
अपने जज्बात लिखता हूँ। 
अपनी खामोशी लिखता हूँ, 
अपने हालात लिखता हूँI 

कभी अमावस लिखता हूँ। 
कभी चांदनी रात लिखता हूँI 

जानते हैं सभी मुझको , 
पर अपने कुछ ,
अनदेखे रूपों की,
पहचान लिखता हूँ। 

जीत लिखता हूँ, 
कभी मैं हार लिखता हूँ। 
दूरियां लिखता हूँ, 
कभी मिलन की रात लिखता हूँ।

मैं कविता नहीं लिखता, 
अपने जज्बात लिखता हूँ। 
अपनी खामोशी लिखता हूँ, 
अपने हालात लिखता हूँI

Vikash Pandey

Kanpur