शारीरिक शक्ति से अधिकतम सौ विरोधियो को जीता जा सकता है किन्तु व्यक्तित्व की शक्ति से हजारो, लाखो या करोडों लोंगो को जीता जा सकता है अतः शरीर निर्माण के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण भी आवश्यक है
जब हम संसार में नहीं होते है तब भी हमारा व्यक्तित्व जीवित रह कर हमारे जीवन को अज़र, अमर और शाश्वत बना देता है
जब हम संसार में नहीं होते है तब भी हमारा व्यक्तित्व जीवित रह कर हमारे जीवन को अज़र, अमर और शाश्वत बना देता है