मैं कविता नहीं लिखता,
अपने जज्बात लिखता हूँ।
अपनी खामोशी लिखता हूँ,
अपने हालात लिखता हूँI
जो किसी से नहीं कहा,
वो बात लिखता हूँ।
काँटे लिखता हूँ,
फूलों की रात लिखता हूँ।
मैं कविता नहीं लिखता,
अपने जज्बात लिखता हूँ।
अपनी खामोशी लिखता हूँ,
अपने हालात लिखता हूँI
कभी अमावस लिखता हूँ।
कभी चांदनी रात लिखता हूँI
जानते हैं सभी मुझको ,
पर अपने कुछ ,
अनदेखे रूपों की,
पहचान लिखता हूँ।
जीत लिखता हूँ,
कभी मैं हार लिखता हूँ।
दूरियां लिखता हूँ,
कभी मिलन की रात लिखता हूँ।
मैं कविता नहीं लिखता,
अपने जज्बात लिखता हूँ।
अपनी खामोशी लिखता हूँ,
अपने हालात लिखता हूँI
Vikash Pandey
Kanpur
अपने जज्बात लिखता हूँ।
अपनी खामोशी लिखता हूँ,
अपने हालात लिखता हूँI
जो किसी से नहीं कहा,
वो बात लिखता हूँ।
काँटे लिखता हूँ,
फूलों की रात लिखता हूँ।
मैं कविता नहीं लिखता,
अपने जज्बात लिखता हूँ।
अपनी खामोशी लिखता हूँ,
अपने हालात लिखता हूँI
कभी अमावस लिखता हूँ।
कभी चांदनी रात लिखता हूँI
जानते हैं सभी मुझको ,
पर अपने कुछ ,
अनदेखे रूपों की,
पहचान लिखता हूँ।
जीत लिखता हूँ,
कभी मैं हार लिखता हूँ।
दूरियां लिखता हूँ,
कभी मिलन की रात लिखता हूँ।
मैं कविता नहीं लिखता,
अपने जज्बात लिखता हूँ।
अपनी खामोशी लिखता हूँ,
अपने हालात लिखता हूँI
Vikash Pandey
Kanpur