चातक
Thursday, February 11, 2016
प्रेम
सम्मान छप्पन भोग से नहीं प्रेम से होता हैं। प्रेम के कारण भगवान श्री कृष्ण ने दुर्योधन के महलों के छप्पन भोग के स्थान पर महात्मा विधुर के घर में प्रेम से केले के छिलके खा लिये थे।
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