मैंने प्रथम बार ध्वज प्रणाम अपनी ननिहाल में किया था जब मैं बहुत छोटा था, उस समय मेरीआयु लगभग 11-12 वर्ष
रही होगी। मेरे प्रथम ध्वज प्रणाम की स्मृति सदैव इसलिये भीअविस्मरणीय रही
है क्योंकि ध्वज प्रणाम करते समय ध्वज दण्ड से मस्तक के स्पर्श के प्रयत्न
में ध्वज को ही असन्तुलित कर बैठा था। फिर मेरे ममेरे भाई ने ध्वज को सन्तुलित किया।