भारत सरकार के पूर्व माननीय प्रधानमंत्री, युग निर्माता, युग पुरुष, भारत रत्न श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिन 25 दिसम्बर 2015 के अवसर पर लिखी गयी अपनी छोटी सी कविता के माध्यम से उन्हें उनकी जयंती के अवसर पर स्मरण करके सम्मान देना चाहूँगा।
बन गये रत्न भारत के तुम
ज्योतिपुंज आरती के तुम
तुम्हारे विचारों की कोमल लताये
हैं सर्वत्र लटक रही
अपने प्याारे अटल के लिये
मानवता है तडप रही
क्यों अपनों से
तुमने मुँह मोड लिया
अपने सपनों की नौका को
क्यों मझधार में छोड दिया
राजनीति के गलियारों को
तुमने ऐसे छोड दिया
जैसे प्राणों ने जीवन से
अपना नाता तोड लिया
बन तपस्वी, बन वनवासी
एकान्तवास के अभिलाषी
मानवता के देवदूत
भारत माँ के सपूत
अटल नाम का सूरज न हो
वह सुबह नही होने देंगे
लाखों आँधी तूफान आये
तुम्हारे आभा मण्डल की
चमक नही खोने देंगे
आने वाले युगों-युगों तक
तुम्हें पुकारा जायेगा
भारत भूमि का कण-कण
अटल-अटल दुहरायेगा
विकास पाण्डेय