माघ मास, नवमी, कृष्ण पक्ष योग आया,
दो हजार पैतीस विक्रम संवत की छाया।
जब स्वाति विचरण कर रही नक्षत्रलोक,
चातक जातक बन धरा पर जन्म पाया।
माघ की दोपहर सूर्य की सरल आंच,
निरखी विद्वान रहे, जन्म लग्न बाच।
निरखी में पुष्प बरसे, सरहन देव हरषे,
मामा मामी आँगन, रहे हैं मोर नाच।