मैं अपनी शक्ति, बल, बुद्धि, विद्या, विवेक, यश, शब्द, व्यक्तित्व का प्रयोग समाजिक हित चिन्तन में लगे लोगों के उद्भव में करने से पीछे नही हटता। वह मुझसे प्राप्त सामर्थ्य से कुछ व्यक्तिगत लाभ भी प्राप्त कर लेता है तो मुझे कोई आपत्ति नही होती।