मैंने जीवन में दो तरह के लोगों को तैयार किया है एक वह जो मेरा प्रचार
करते हैं, दूसरे वह जो मेरा दुष्प्रचार करते हैं। प्रचार का तो मुझे
प्रत्यक्ष लाभ होता है कि मेरी सकारात्मक चर्चा होती है। दुष्प्रचार का भी
मुझे अप्रत्यक्ष लाभ होता है क्योंकि दुष्प्रचार करने वालों के हाथ में
मेरी चर्चा प्रारंभ करना तो है, चर्चा खत्म करना नहीं है। स्मरण रखना चाहिए
कि जब कोई चर्चा प्रारंभ हो जाती है तो उसके पश्चात चर्चा प्रारंभ करने
वालों के हाथ से निकल कर के उन लोगों के मध्य पहुंच जाती है जो व्यक्ति उसे
सुन रहे होते हैं और उस चर्चा पर उनके स्वयं के तर्क, विचार, भाव आदि
प्रभाव डालने लगते है। मुझे मालूम है कि सादगी पूर्ण विचारों से अधिक चर्चा
चटपटे विचारों की होती है। जब कुछ लोगों ने मेरी कुछ बातों की चर्चा की तब
मैं मन में मुस्कराया और सोचा महानुभाव आपका ध्यान वही क्यों गया!