आजकल कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी में नए लोगों के आने से बहुत अधिक
परेशान हो जाते हैं, मैं उन लोगों से यही कहना चाहता हूं कि उस समय को याद
करिए जब भारतीय जनता पार्टी कार्यालय खामोशियों में डूबा रहता था और
कार्यालय की खामोशी श्री दिवाकर नाथ त्रिपाठी जी की उन्मुक्त हंसी से ही
टूटती थी और आज यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि कम से कम उस कार्यालय
में रौनक तो है! वह दौर भी याद करिए जब उस कार्यालय में श्री शिव शरण पाठक
जी संगठन मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे और उस समय कार्यालय की स्थिति
यह थी कि बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता था। एक शाम जब मैं कार्यालय
में गया उस समय कार्यालय में श्री शिव शरण पाठक जी (तत्कालीन विभाग संगठन
मंत्री, प्रयाग), पूर्व विधायक श्री प्रभाशंकर पाण्डेय जी, श्री दिवाकर नाथ
त्रिपाठी जी एवं श्री अजय त्रिपाठी जी थे। श्री शिव शरण पाठक जी ने श्री
प्रभा शंकर पाण्डेय जी को खिसकने का संकेत किया और श्री प्रभा शंकर पाण्डेय
जी थोड़ा खिसक गए तो मैं भी आसन में बैठ गया। बैठ करके मैं सोच रहा था कि
अगर कार्यालय गिरा तो किस ओर से भागेंगे और भागेंगे तो शेष बचेंगे या
स्मृतिशेष! कुछ समय पश्चात समय बदला और 2014 में वाराणसी से श्री नरेंद्र
मोदी जी जब माननीय लोक सभा सांसद के रूप में चुने गये तब श्री शिव शरण पाठक
जी को उनके लोक सभा कार्यालय का प्रभारी बना दिया गया।
इसलिये मित्रों बदले हुये समय का स्वागत करिये। हृदय में प्रसन्नता का भाव
रखिये कि आज जो व्यक्ति पूजा जा रहा है, स्वार्थ वश ही सही! मेरा आत्मीय
है।